टिकटों में हर बार ठगे जाते हैं इंदौरी, मुफ्तखोरों को तवज्जो; आखिर मैच के टिकट जाते कहाँ हैं?

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टिकटों में हर बार ठगे जाते हैं इंदौरी, मुफ्तखोरों को तवज्जो; आखिर मैच के टिकट जाते कहाँ हैं?
विशेष रिपोर्ट: खुशी श्रीमाल, खबर पर नजर परिवार
इंदौर। शहर के होलकर स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मैच का आयोजन होना इंदौरियों के लिए गर्व की बात होती है, लेकिन यही आयोजन आम क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं होता। हर बार की तरह इस बार भी शहर का आम नागरिक खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। ‘khabr par najar ‘ के माध्यम से सामने आई इस जमीनी सच्चाई ने प्रशासन और क्रिकेट संघ की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर हजारों की संख्या में आने वाले टिकट जनता के बीच पहुँचने से पहले ही कहाँ गायब हो जाते हैं? क्या इंदौर में मैच केवल रसूखदारों और रसूख रखने वाले परिवारों के मनोरंजन के लिए आयोजित किए जाते हैं?
रसूखदारों के घर पहुँचते हैं टिकट, आम जनता के हिस्से सिर्फ लंबी कतारें
जमीनी हकीकत यह है कि जब टिकटों की आधिकारिक बिक्री शुरू होती है, तो आम इंदौरी घंटों कतारों में खड़ा रहता है या ऑनलाइन वेबसाइट पर ‘सोल्ड आउट’ का संदेश देखकर निराश हो जाता है। वहीं दूसरी ओर, शहर के रसूखदार नेताओं, प्रशासनिक अफसरों, पुलिस विभाग और उनके खास परिचितों के घरों तक फ्री पास और टिकटों के बंडल बिना किसी मशक्कत के पहुँच जाते हैं। यह विडंबना ही है कि जो टिकट आम जनता के लिए ‘असंभव’ हैं, वही रसूखदारों के ‘कुनबे’ के लिए सहजता से उपलब्ध हैं।
ऑनलाइन बुकिंग का मायाजाल और कालाबाजारी का तांडव
ऑनलाइन टिकट बुकिंग के नाम पर चल रहे खेल ने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता को खत्म कर दिया है। मध्यम वर्गीय परिवार का वह युवा जो अपनी पॉकेट मनी बचाकर मैच देखना चाहता है, उसे एक टिकट तक नसीब नहीं होता। हैरानी की बात यह है कि जो टिकट सिस्टम में ‘सोल्ड आउट’ दिखते हैं, वही ब्लैक मार्केट में अपनी असली कीमत से चार गुना ज्यादा दाम पर बिकते पाए जाते हैं। 1500 रुपये का टिकट 6000 रुपये तक में बिक रहा है। आखिर यह कालाबाजारी किसके संरक्षण में फल-फूल रही है और सिस्टम की इस सेंधमारी का जिम्मेदार कौन है?
आम जनता का सवाल: इंदौर में मैच होते ही क्यों हैं?
जब शहर के असली प्रशंसकों को स्टेडियम की सीढ़ियां तक नसीब नहीं होतीं, तो जनता का यह पूछना लाजमी है कि इंदौर में मैच कराने का औचित्य क्या है? क्या ये मैच केवल रसूखदारों की सुख-सुविधा और वीआईपी मेहमाननवाजी के लिए रखे जाते हैं? आम जनता की इस पीड़ा और क्रिकेट के प्रति उनके जुनून का मजाक उड़ाया जाना अब बर्दाश्त से बाहर है।
खबर पर नजर परिवार और खुशी श्रीमाल प्रशासन से यह मांग करते हैं कि इस ‘टिकट घोटाले’ की जांच हो और भविष्य में टिकट वितरण की एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जहाँ आम इंदौरी को रसूख के बिना, ईमानदारी से मैच देखने का हक मिले।
वेबसाइट: KPNindia.in
खबर पर नजर पत्रकार: शैलेंद्र श्रीमाल

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Author: KPN News

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