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विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा: विजयवर्गीय का छलका दर्द, मुख्यमंत्री को मांगनी पड़ी माफी
भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का चौथा दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन में उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस ‘औकात’ तक जा पहुंची। अडानी समूह और सरकार के बीच हुए समझौतों के दस्तावेजों को लेकर शुरू हुई यह बहस इतनी व्यक्तिगत हो गई कि विजयवर्गीय ने आपा खोते हुए सिंघार से कह दिया— “औकात में रहो…”
विजयवर्गीय के इस बयान पर विपक्ष लामबंद होकर उन पर बरस पड़ा। हालांकि, माहौल बिगड़ता देख विजयवर्गीय ने आत्मग्लानि व्यक्त करते हुए कहा, “आज मैं अपने आप से संतुष्ट नहीं हूं। मेरे सब्र का बांध टूट चुका है। सदन में पहली बार मुझे इतना गुस्सा आया है।” उन्होंने स्वीकार किया कि सिंघार की बॉडी लैंग्वेज के कारण वे विचलित हो गए थे।
मामले को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। मुख्यमंत्री ने बड़प्पन दिखाते हुए सदन में सभी की तरफ से माफी मांगी, जिसके बाद उमंग सिंघार के तेवर भी नरम पड़े। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह तोमर ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पटवा जी की मर्यादा को याद किया कि गुस्सा शब्दों में नहीं झलकना चाहिए।
सियासी गलियारों में चर्चा तेज
विजयवर्गीय के ‘सब्र का बांध’ टूटने और उनके बार-बार छलकते दर्द ने इंदौर सहित पूरे प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक पंडित अब दबे स्वर में पूछ रहे हैं कि आखिर विजयवर्गीय के मन में ऐसी कौन सी कसक या टीस है, जो बार-बार उनके शब्दों के जरिए बाहर आ रही है? क्या यह केवल सदन की बहस थी या सत्ता के भीतर की कोई गहरी छटपटाहट?
शैलेंद्र श्रीमाल (पत्रकार)
वेबसाइट: KPNindia.in










