महापौर पुष्यमित्र भार्गव का बड़ा बयान: ‘पुरानी पाइप लाइनों से हो रही है दिक्कत, बदलने का काम जारी’
इंदौर। नगर निगम महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर की जल व्यवस्था और अधोसंरचना को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि शहर के कुछ हिस्सों, विशेषकर भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में दूषित पानी की समस्या पुरानी लाइनों की वजह से हुई है।
प्रमुख बिंदु और बड़ी बातें:
* पुरानी लाइनों का संकट: महापौर ने बताया कि जिन क्षेत्रों में बोरिंग के पानी में प्रदूषण पाया गया, वहां पाइप लाइनें 30 से 35 साल पुरानी हैं। हालांकि नई लाइनें डाली गई हैं, लेकिन पुराने कनेक्शनों की वजह से गंदा पानी आने की समस्या बनी हुई है।
* 2045 तक का विजन: नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू कर दिया गया है। नगर निगम का लक्ष्य है कि वर्ष 2045 तक इंदौर के नागरिकों को पर्याप्त और शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए निगम लगातार ऋण लेकर काम पूरा कर रहा है।https://www.hearingcareaid.in/contact
* डिजिटल मैपिंग: शहर में डुप्लीकेट और उलझी हुई पाइप लाइनों की समस्या को खत्म करने के लिए 2022 से लाइनों की डिजिटल मैपिंग का काम शुरू किया गया है, ताकि भविष्य में कोई भ्रम न रहे।
* सड़कों का मास्टर प्लान: शहर में सड़कों की खराब हालत पर महापौर ने स्पष्ट किया कि पहली बार इंदौर में इतने बड़े पैमाने पर ड्रेनेज और पानी की पाइप लाइन डालने का काम हो रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बारिश से पहले सड़कों के पैचवर्क का काम पूरा कर लिया जाएगा।
* विकास के नए कीर्तिमान: इंदौर को ‘सोलर सिटी’ बनाने की दिशा में 30 हजार से ज्यादा घरों में सोलर रूफटॉप लगाए जा चुके हैं, जिनसे 100 मेगावाट बिजली मिल रही है। साथ ही जलूद प्लांट में सोलर प्लांट की कमीशनिंग का काम अंतिम चरण में है।
* प्रशासनिक तालमेल: कार्यकाल के दौरान चार कमिश्नर बदलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इससे इंदौर के स्वच्छता अभियान या विकास कार्यों की गति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
निष्कर्ष:
महापौर ने जोर देकर कहा कि उनकी परिषद ने भविष्य के इंदौर की आधारशिला रखी है। चाहे वह सड़कों का जाल बिछाना हो या भू-माफियाओं से जमीन मुक्त कराना (जैसे हुकमचंद मिल प्रकरण), नगर निगम इंदौर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
– खबर पर नजर परिवार के लिए खुशी श्रीमाल की रिपोर्ट।










