प्रीतमलाल दुआ सभागृह: सुविधाओं का ‘श्रृंगार’ तो हुआ, लेकिन किराए ने बढ़ाई चिंता
क्या इस तरह मिल पाएगी ‘दुआ’? बैठक क्षमता सिर्फ 114 और किराया 12 हजार
खबर पर नजर | विशेष रिपोर्ट
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा नव-श्रृंगारित प्रीतमलाल दुआ सभागृह का कल सोमवार को अनौपचारिक शुभारंभ संभागायुक्त डॉ. सुदामा खाड़े द्वारा किया गया। कई संस्थाओं की मांग पर तैयार हुए इस सभागृह को लाइट, साउंड और वातानुकूलन (AC) जैसी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।
शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं को उम्मीद थी कि इसका किराया अन्य सभागृहों की तुलना में किफायती होगा, ताकि सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। लेकिन जारी की गई किराया सूची ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
किराए का गणित: छोटी संस्थाओं पर भारी
मात्र 114 की बैठक क्षमता वाले इस सभागृह का 4 घंटे का किराया ₹12,000 तय किया गया है। शहर में अन्य प्रमुख सभागृहों की तुलना में यह काफी महंगा साबित हो रहा है।
किराए और क्षमता की तुलना:
| सभागृह का नाम | बैठक क्षमता | किराया (अनुमानित) |
|—|—|—|
| प्रीतमलाल दुआ सभागृह | 114 | ₹12,000 |
| इंदौर प्रेस क्लब (AC) | ~175 | ₹8,000 |
| अभिनव कला समाज | ~250 | ₹8,000 – ₹9,000 |
| हिंदी साहित्य समिति | – | ₹7,000 |
कैसे मिलेगा संस्कृति को बढ़ावा?
इंदौर की छोटी-मोटी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं अक्सर आपसी सहयोग (Contributory) से गीत-संगीत, नाटक और अन्य कार्यक्रम आयोजित करती हैं। ऐसे में इतना महंगा किराया वहन करना उनके लिए मुश्किल होगा। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी तंत्र वाकई शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहता है, या यह केवल राजस्व का जरिया बनकर रह गया है?
अफ़सरशाही के रवैये पर सवाल
हाल ही में इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा आजीवन लीज व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय और अब सभागृह का यह महंगा किराया, यह दर्शाता है कि जनहित के मामलों में अफ़सरशाही का रवैया किस दिशा में जा रहा है।










