प्राइवेट फोटो से कोई नहीं कर पाएगा ब्लैकमेल

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[9:02 AM, 3/2/2026] पत्रकार शैलेंद्र श्रीमाल KPN News:

प्राइवेट फोटो से कोई नहीं कर पाएगा ब्लैकमेल

सरकारी एजेंसी ने बताया बचाव का मंत्र

 

ब्लैकमेलिंग की आपने कई खबरें पढ़ीं होंगी, जिसमें विक्टिम को परेशान किया जाता है. यहां तक की रुपये तक की डिमांड करते हैं. कुछ मामले में विक्टिम आत्महत्या तक कर लेते हैं. आम लोगों की सेफ्टी के लिए गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी साइबर दोस्त I4C ने एक पोस्ट किया है. X प्लेटफॉर्म पर साइबर दोस्त I4C ने पोस्ट किया है. पोस्ट में बताया है कि अगर आपको कोई प्राइवेट फोटो के नाम पर ब्लैक मेल कर रहा है तो उसको कैसे रोका जा सकता है. इसके लिए बड़ा ही सिंपल प्रोसेस फॉलो करना होगा. साइबर दोस्त ने बताया है कि अगर आपको भी धमकी दे रहा है और प्राइवेट फोटो को इंटरनेट पर शेयर करने को कहता है. तो उसको रोका जा सकता है. इसके लिए एक खास प्रोसेस को फॉलो करना होगा. साइबर दोस्त ने बताया है कि StopNCCI.org पर विजिट करें. वहां अपनी इमेज या वीडियो से जुड़ा एक डिजिटल फिंगरप्रिंट (HASH) बनाएं.https://www.hearingcareaid.in/contact

HASH या कोड प्राइवेट फोटो या वीडियो को रिप्रजेंट करता है. ये पूरा प्रोसेस आपके डिवाइस पर होता है. इसकी वजह से फोटो और वीडियो सेफ रहती हैं और वे कहीं अपलोड नहीं होती हैं. StopNCII.org, एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां आप बिना सहमति के शेयर की गई प्राइवेट या वीडियो के मिसयूज को रोक सकेंगे. इसको एक इंटरनेशनल एजेंसी ऑपरेट करती है. StopNCII Dot org असल में प्राइवेट फोटो या वीडियो कोड में कन्वर्ट करता है.

यह कोड पार्टनर सोशल मीडिया कंपनियों को शेयर किया जाता है और उससे संबंधित फोटो को पहचानकर उनको रिमूव किया जाता है. गलत इरादे से अगर कोई फोटो या वीडियो अपलोड भी करने की कोशिश करता है तो उसको तुरंत ब्लॉक किया जाता है. StopNCII Dot org के साथ कई बड़े-बड़े प्लेटफॉर्म मिलकर काम करते हैं. इसमें Meta (फेसबुक और इंस्टाग्राम), टिकटॉक, रेडिट, स्नैपचैट आदि के नाम शामिल हैं.
[9:48 AM, 3/1/2026] पत्रकार शैलेंद्र श्रीमाल KPN News: यहाँ आपकी पूरी खबर का एक संयुक्त, विस्तृत और प्रभावशाली ड्राफ्ट है, जिसमें वैश्विक राजनीति के साथ-साथ दुबई के आर्थिक असर को भी गहराई से पिरोया गया है:
ट्रंप का ‘परमाणु’ अवतार और टूटता वैश्विक संतुलन: क्या दोस्ती की आड़ में भारत की जेब पर हो रहा है प्रहार?
ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की विदाई को केवल एक सत्ता का अंत मानना भारी भूल होगी। जिसे दुनिया ‘रणनीतिक अवसर’ (Strategic Opportunity) का चश्मा पहनकर देख रही है, असल में वह उस वैश्विक शक्ति संतुलन के ढहने का शोर है जिसने अब तक एकध्रुवीय तानाशाही को रोक रखा था। खामेनेई उन गिने-चुने नेताओं में थे जिन्होंने अमेरिका और खासकर डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीतियों के सामने झुकने के बजाय सीधे टकराव का कठिन रास्ता चुना। अब सवाल यह है कि इस घटनाक्रम से दुनिया को क्या संदेश मिला? यदि कोई महाशक्ति यह स्थापित कर दे कि “हमसे डरो, वरना मिट जाओ”, तो यह वैश्विक शांति के लिए एक विनाशकारी संकेत है।
इस पूरे मंजर में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि हम जिस ट्रंप को अपना ‘परम मित्र’ मान रहे हैं, वह असल में एक ऐसा ‘परमाणु विस्फोटक’ है जिसकी पिन कब और कहाँ निकलेगी, कोई नहीं जानता। आज यह विस्फोट ईरान में हुआ है, कल इसकी तपिश हमारे करीब भी आ सकती है। ट्रंप की छवि किसी ‘शांतिदूत’ की नहीं, बल्कि एक ऐसे वर्चस्ववादी की है जो तब तक आपको अपना मानता है जब तक आप उसके इशारों पर ‘कठपुतली’ बने रहें। जो भी उनके खिलाफ सिर उठाएगा, उस पर मिसाइलों और प्रतिबंधों की बौछार तय है। आज पूरी दुनिया के सामने ट्रंप यह साबित करने में जुटे हैं कि शक्ति ही एकमात्र सत्य है, और यही कारण है कि बड़े-बड़े देश धीरे-धीरे उनके आगे नर्तक की तरह झुकते जा रहे हैं।
इस युद्ध और तनाव का सीधा असर अब दुबई से लेकर भारत तक हमारी जेबों पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों में युद्ध की आहट ने तेल और कीमती धातुओं के बाजार में आग लगा दी है। 1 मार्च 2026 से दुबई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है। सुपर 98 पेट्रोल अब 2.59 AED और डीजल 2.72 AED प्रति लीटर तक पहुंच गया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए यह महंगाई जल्द ही हमारी रसोई और परिवहन पर भारी पड़ने वाली है। केवल तेल ही नहीं, सुरक्षित निवेश की तलाश में भागते निवेशकों की वजह से सोने-चांदी की चमक भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रही है। दुबई में 24K सोना 636 AED प्रति ग्राम के पार जा चुका है, जबकि भारत में चांदी ₹2.90 लाख प्रति किलो के आंकड़े को छूने को बेताब है।
ईरान के पास तो फिर भी कुछ ‘परखे हुए’ दोस्त थे, लेकिन भारत की स्थिति आत्मचिंतन की मांग करती है। हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कागजी समझौतों की भीड़ तो जमा कर ली है, लेकिन क्या हमारे पास कोई ऐसा कंधा है जो युद्ध की विभीषिका में हमारे साथ खड़ा हो सके? दुश्मनों का ग्राफ हर रोज बढ़ रहा है। यदि व्लादिमीर पुतिन जैसा आक्रामक नेता भी इस समय खामोश होकर पीछे हटने की रणनीति अपना रहा है, तो समझ लीजिए कि खतरा कितना अप्रत्याशित है।
यह समय किसी भ्रम में जीने का नहीं है। एक ‘पागल कुत्ता’ कब और किसे अपना शिकार बना ले, यह कोई नहीं जानता। इसलिए न तो खुद किसी प्रोपेगेंडा के बहकावे में आएं और न ही दूसरों को यह पट्टी पढ़ाएं कि ट्रंप हमारे ‘बेस्ट फ्रेंड’ हैं। कूटनीति के बाजार में दोस्ती केवल एक व्यापारिक सौदा है। अगर हम आज आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर नहीं चेते, तो इतिहास हमें उस मोड़ पर खड़ा कर देगा जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा।

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Author: KPN News

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