इंदौर में कल से बेटियों के लिए कवच: मुफ्त लगेगा 5000 का एचपीवी टीका
इंदौर जिले की बेटियों के सुनहरे और स्वस्थ भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत होने जा रही है। आज 28 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आधिकारिक रूप से एचपीवी (HPV) टीकाकरण का शुभारंभ किया जाएगा। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षा प्रदान करना है। भारत में महिलाओं के बीच स्तन कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा कैंसर का रूप माना जाता है, और आंकड़ों के अनुसार, लगभग 99 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामले एचपीवी वायरस के संक्रमण के कारण ही होते हैं।
यह टीकाकरण अभियान विशेष रूप से उन किशोरियों के लिए है जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है, लेकिन अभी 15 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस आयु वर्ग में वैक्सीन की एक सिंगल डोज ही पूर्णतः प्रभावी मानी जाती है। सबसे राहत की बात यह है कि बाजार में जिस एक डोज की अनुमानित कीमत लगभग 4000 से 5000 रुपये के बीच है, उसे सरकार द्वारा इस अभियान के तहत किशोरियों को पूरी तरह से निःशुल्क लगाया जाएगा।
टीकाकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए यू-वीन (U-WIN) पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इच्छुक लाभार्थी इस पोर्टल पर जाकर अपना ‘सेल्फ-रजिस्ट्रेशन’ कर सकते हैं और अपनी सुविधानुसार स्लॉट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पा रहे हैं, उनके लिए वैक्सीनेशन सेंटर पर ‘ऑन-द-स्पॉट’ रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र, स्टूडेंट फोटो आईडी, राशन कार्ड या बैंक पासबुक जैसे वैध दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकता है। सफल टीकाकरण के बाद प्रमाण-पत्र भी यू-वीन पोर्टल के माध्यम से ही जेनरेट होगा।
इंदौर जिले में इस अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने के लिए कुल 23 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। कल दोपहर 12:00 बजे शुभारंभ के बाद, यह टीका सभी कार्य दिवसों पर सुबह 09:00 बजे से दोपहर 02:00 के बीच उपलब्ध रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन बच्चों को पहले ही यह टीका निजी तौर पर या किसी अन्य माध्यम से लग चुका है, उन्हें दोबारा टीका नहीं लगाया जाएगा, हालांकि उनकी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और वर्तमान में दुनिया के लगभग 148 देशों में सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही है।










