अधिकारियों की ‘कुंडली’ खंगालने की बजाय नेताओं पर ‘कालिख’ पोतने की साजिश क्यों?

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भागीरथपुरा जल त्रासदी
अधिकारियों की ‘कुंडली’ खंगालने की बजाय नेताओं पर ‘कालिख’ पोतने की साजिश क्यों?
सिस्टम की विफलता को सियासी रंग देने की कोशिश; इंदौर को शोर नहीं, समाधान चाहिए
इंदौर (ब्यूरो, खबर पर नजर):
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने इंदौर के दामन पर गहरा दाग लगाया है। हर कोई आहत है, गुस्सा जायज है। लेकिन इस गुस्से की आड़ में जो खेल खेला जा रहा है, उस पर ‘खबर पर नजर’ ने गहराई से पड़ताल की है। सवाल यह है कि क्या एक तकनीकी और प्रशासनिक विफलता का ठीकरा जानबूझकर राजनीतिक चेहरों पर फोड़ा जा रहा है ताकि असली गुनहगार (अफसर) बच निकलें?
पर्दे के पीछे छिपे ‘असली दोषी’
धरातल की सच्चाई यह है कि शहर में पानी की सप्लाई, पाइपलाइन की टेस्टिंग और लीकेज सुधारने का काम नेताओं का नहीं, बल्कि नगर निगम के तकनीकी अमले का है। अगर नलों से ‘जहर’ सप्लाई हुआ, तो यह सिस्टम की घोर लापरवाही है। लेकिन हैरानी की बात है कि सवाल उन अफसरों से पूछने की बजाय सोशल मीडिया पर एक अलग ही ‘ट्रायल’ चलाया जा रहा है।
40 साल की तपस्या पर ‘बयानबाजी’ का प्रहार
बीते चार दशकों से इंदौर की आवाज बनकर सार्वजनिक जीवन जीने वाले कैलाश विजयवर्गीय को जिस तरह इस मामले में घसीटा गया, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। आपदा के समय जब जरूरत पीड़ितों के आंसू पोंछने की थी, तब कुछ ‘बयानवीर’ तथ्यों से आंख मूंदकर चरित्र हनन में जुट गए। लोकतंत्र में विरोध सही है, लेकिन किसी की दशकों की सेवा को एक हादसे की आड़ में खारिज कर देना न तो पत्रकारिता है और न ही संवेदनशीलता।
नेतृत्व की कसौटी: आरोप नहीं, एक्शन
सच्चाई यह भी है कि घटना पता चलते ही प्रशासनिक मशीनरी को दौड़ाने और पीड़ितों तक मदद पहुंचाने में नेतृत्व ने देर नहीं की। लेकिन सोशल मीडिया के दौर में शोर इतना ज्यादा है कि समाधान की बात दब गई है। पीड़ा को राजनीति का हथियार बनाने से किसी उजड़े परिवार को राहत नहीं मिलने वाली।
KPN का सवाल: अब आगे क्या?
यह वक्त आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि ‘जवाबदेही’ तय करने का है। खबर पर नजर प्रशासन से सीधी मांग करता है:
* नगर निगम की जल वितरण प्रणाली की निष्पक्ष और हाई-लेवल तकनीकी जांच हो।
* सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि जिम्मेदार बड़े अफसरों पर गाज गिरे।
* इंदौर की जनता को भरोसा दिलाया जाए कि भविष्य में नल से मौत नहीं आएगी।
निष्कर्ष:
इंदौर को सियासी ड्रामे की नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत है। निशाना सही जगह लगाइए, वरना शोर मचेगा और असली दोषी फाइलों की धूल में कहीं गुम हो जाएंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट, खबर पर नजर (KPN)
(KPN NEWS – इंदौर)

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Author: KPN News

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