इजरायल और अमेरिका का ‘ऑपरेशन तेहरान’: कैसे हुआ खामेनेई का अंत?
खबर पर नजर विशेष रिपोर्ट — खुशी श्रीमाल
तेहरान/वॉशिंगटन: यह किसी हॉलीवुड फिल्म की पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन हकीकत में यह एक दशक से बुनी जा रही उस खुफिया रणनीति का नतीजा थी जिसने ईरान की सुरक्षा दीवार को ढहा दिया। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर अयातुल्ला अली खामेनेई को जिस तरह निशाना बनाया, उसकी परतें अब ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के बाद खुलनी शुरू हुई हैं। यह हमला महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और इंसानी जासूसी का एक घातक मेल था।
खबर पर नजर परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है, मैं हूँ खुशी श्रीमाल। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इजरायल ने सालों पहले से ही ईरान की राजधानी तेहरान की रग-रग पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। इजरायली खुफिया एजेंसियों ने तेहरान के उन तमाम ट्रैफिक कैमरों तक को हैक कर लिया था जो खामेनेई के दफ्तर और आवास के आसपास लगे थे। इन कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों के जरिए यह गणित बिठाया गया कि सुरक्षा गार्डों की शिफ्ट कब बदलती है, काफिले की गाड़ियां ठीक किस जगह खड़ी होती हैं और परिसर के भीतर आम जनजीवन का रूटीन क्या है। यानी बिना वहां मौजूद रहे, इजरायल के पास उस अभेद्य किले का पूरा ‘लाइफ पैटर्न’ मौजूद था।https://www.hearingcareaid.in/services
सिर्फ कैमरे ही नहीं, बल्कि मोबाइल नेटवर्क और संचार टावरों पर भी पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया था। तकनीक ऐसी थी कि जरूरत पड़ने पर हमला शुरू होते ही उन खास टावरों को ठप किया जा सकता था, ताकि सुरक्षा घेरे को समय पर कोई चेतावनी न मिल सके और कॉल लगने बंद हो जाएं। इस पूरे जाल के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी का एक जमीनी जासूस भी सक्रिय था, जिसने ऐन मौके पर यह पक्का किया कि खामेनेई ठीक किस कमरे में और किन अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं।
जब यह पूरी तरह साफ हो गया कि एक खास सुबह खामेनेई अपने वरिष्ठ कमांडरों के साथ मीटिंग में होंगे, तब हमले का अंतिम आदेश दिया गया। सबसे पहले साइबर हमले के जरिए ईरान के रडार और निगरानी तंत्र को ‘अंधा’ कर दिया गया, ताकि लड़ाकू विमानों के लिए रास्ता साफ रहे। इसके बाद बेहद सटीक हथियारों (Precision Weapons) से दफ्तर को निशाना बनाया गया। जानकारों का मानना है कि समय का चुनाव सबसे अहम था; क्योंकि अगर युद्ध का अंदेशा जरा भी पहले होता, तो ईरानी नेता बंकरों में चले जाते और उन्हें निशाना बनाना नामुमकिन हो जाता।
इस बड़ी घटना ने दुनिया को दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सरहदों पर नहीं, बल्कि खामोश तैयारी और तकनीक के जरिए लड़े जाते हैं। हालांकि, इसके परिणाम स्वरूप ईरान ने कतर और दुबई पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे खाड़ी देशों में तनाव चरम पर है। देश और दुनिया की ऐसी ही गहन खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।
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पत्रकार: शैलेंद्र श्रीमाल (खबर पर नजर)










